Thursday, 18 April 2013

शिक्षा का अधिकार: तीन साल में क्या खोया,क्या पाया


शिक्षा के अधिकार (आरटीई) कानून तीन साल का हो गया हैं.लेकिन इन तीन सालो ने यह सिखाया कि सही कानून बिना प्रशासनिक दक्षता के नतीजे नहीं दे सकता. तय मापदंडो को पूरा करने की अवधि समाप्त हो गयी मगर नतीजे इसकी पोल खोल रहे हैं.
  
गैर सरकारी संस्था प्रथम द्वारा जारी रिपोर्ट असरमें साफ़ कहा हैं देश में 12 लाख शिक्षको की कमी हैं 20% से ज्यादा शिक्षक अप्रशिक्षित हैं.शिक्षक विद्यार्थी के अनुपात में बड़ा अंतर हैं.पांचवी कक्षा के 53 फीसदी  बच्चे कक्षा दो का पाठ तो दूर  2 अंक का जोड़ घटाना भी नहीं जानते .स्कूलों में पीने के पानी और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधा नहीं हैं जिसके कारण बच्चे बीच में ही पढाई छोड़ रहे हैं .साथ ही शिक्षा में भी खर्च जीडीपी का 3.5%  हैं  जबकि कोठारी आयोग ने 6% की सिफारिश की हैं.
   
 इन तीन सालो में बहस स्कूलों में  25 फीसदी आरक्षण लागू कराने और नामांकन बढाने पर रही. जबकि गुणवत्ता और कौशलपूर्ण शिक्षा की ज़रूरत हैं .पाठ्यक्रम को रोचक और व्यव्क्तित्व निर्माण के अनुकूल बनाना होगा.अब तक केवल 18 राज्यों ने ही अपना पाठ्यक्रम सुधारा हैं.कोठारी आयोग की सामानांतर स्कूल प्रणाली की सिफारिश लागू हो और शिक्षको को उचित प्रशिक्षण मिले.क्यूंकि शिक्षा किसी भी देश की दिशा बदल सकती हैं     

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