नीतिश कुमार ने दिल्ली में अधिकार रैली के
ज़रिये बिहार को विशेष दर्जा देने की मांग उठाई.नीतीश लम्बे समय से केंद्र सरकार से ये
मांग कर रहे हैं लेकिन इस बार उन्होंने एक तीर से कई निशाने साधे.जहा
एक ओर जनता की उम्मीद पूरी न करने के कारण उपज रहे गुस्से को शांत करने की कोशिश
की वही बिहार के भविष्य की सुनहरी कल्पना भी दिखाई.साथ ही 2014 में नए राजनैतिक
समीकरण बनाने के संकेत भी दिए
अभी तक
जटिल भौगौलिक स्थिति,कम और बिखरी जनसँख्या,सीमित राजस्व और अंतर्राष्ट्रीय सीमा
के कारण 11 राज्यों को विशेष दर्जा प्राप्त हैं.लेकिन बिहार इन में से किसी भी मापदंड
पर खरा नहीं उतरता.पिछले कुछ वर्षो से तीव्र आर्थिक वृद्धि के बावजूद
बिहार मानव विकास के सभी पैमाने में पीछे हैं जिसकी मुख्य वजह हैं प्रशासनिक
खामियां और राज्य के बटवारे के बाद संसाधनो का सिमित होना.लेकिन अगर सामाजिक और आर्थिक पिछड़ेपन
को भी विशेष दर्जे का पैमाना बनाया तो कई राज्यो में पिछड़ने की होड़ लग जाएगी और
सभी विशेष दर्जे की मांग करने लगेंगे.जो देश के विकास के लिए घातक होगा.
बहरहाल नीतीश ने इस पैंतरे से अपनी राजनीतिक
ताकत का एहसास कराया हैं.अगले आम चुनाव में बिहार के हित की आड़ में अपना
राजनैतिक भविष्य बचाना होशियारी भरा कदम हैं.

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