Thursday, 9 May 2013

चिट फण्ड के फेर में निवेशक

आम जनता की गाड़ी कमाई लेकर भागने वाली पोंज़ी स्कीम आजकल खूब सुर्ख़िय बटोर रही हैं. ताज़ा मामला पश्चिम बंगाल के शारधा ग्रुप का हैं जिसके दिवालिया होने के कारण निवेशको के 30 हज़ार करोड़ रूपये डूबने का खतरा हैं

चिट फण्ड कंपनिया गरीब और अशिक्षित तबके को बाज़ार भाव से ज्यादा ब्याज का भरोसा देकर, रकम जमा करने को राज़ी करा लेती हैं. शुरुआत में ये देती भी हैं लेकिन जब निवेश मिलना बंद हो जाता हैं ये जमा पूंजी लेकर फरार हो जाती हैं .स्पीक एशिया, उल्लास किरकिरे आदि जैसे मामले सामने आने के बाद भी इन कंपनियों के लिए स्पष्ट कानून और नियामक का अभाव हैं इसी कारण इन पर कार्यवाही मुश्किल होती हैं. एक अनुमान के अनुसार चिट फण्ड कंपनियों के पास 30 ट्रिलियन रूपये जमा हैं जो सार्वजनिक बैंकों में जमा 64.2 ट्रिलियन(फरवरी 2013) का करीब आधा हैं.

धोखे के इस धंधे पर नकेल कसने के लिए स्वतंत्र नियामक का गठन करना होगा ,सेबी को भी प्रयाप्त संसाधन देने होंगे,केंद्र और राज्य की अलग आलग ज़िम्मेदारी तय हो. लोगो को बैंकिंग के दायरे में लाना होगा.साथ ही निवेशको को भी जागरूक और छोटी बचत को आकर्षक बनाने की ज़रूरत हैं

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